उत्तराखंड के हज यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सभी 1,526 आवेदकों का हुआ चयन



City News Network ::::(मौहम्मद नाज़िम)
रुड़की: उत्तराखंड के हज आवेदकों के लिए एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। हज-2027 के लिए प्रदेश से आवेदन करने वाले सभी 1,526 आवेदकों का चयन हो गया है। इस महत्वपूर्ण जानकारी के सामने आते ही राज्यभर के चयनित हज यात्रियों और उनके परिवारों में खुशी और उत्साह का माहौल है।
इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य हज समिति के सदस्य एड. समीर रज़ा जाफरी ने सभी चयनित हज यात्रियों को दिली मुबारकबाद देते हुए उनके लिए सफल, सुरक्षित और कबूल हज यात्रा की दुआ की। इस दौरान एड.समीर रज़ा जाफरी ने कहा कि हज जैसी पवित्र और मुकद्दस यात्रा के लिए चयन होना किसी भी मुसलमान के लिए एक बड़ा आध्यात्मिक सौभाग्य होता है।
यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि इबादत, समर्पण, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देने वाला पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सभी आवेदकों का चयन होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व और खुशी की बात है। वहीं उन्होंने चयनित हज यात्रियों से अपील की है कि वह यात्रा से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर लें। पासपोर्ट, स्वास्थ्य परीक्षण, प्रशिक्षण कार्यक्रम, आवश्यक दस्तावेज और हज कमेटी द्वारा निर्धारित सभी औपचारिकताओं को समय सीमा के भीतर पूरा करना बेहद जरूरी है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। एड. समीर रज़ा जाफरी ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार और राज्य हज समिति हज यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। यात्रियों को यात्रा से जुड़ी हर आवश्यक जानकारी, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी पूरी यात्रा सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सहज ढंग से संपन्न हो सके।
उन्होंने कहा कि हज यात्रा के दौरान अनुशासन, धैर्य और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रत्येक यात्री की जिम्मेदारी है। हज का संदेश प्रेम, समानता, सेवा और शांति का संदेश है, इसलिए सभी यात्रियों को इस पवित्र यात्रा की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। एड. समीर रज़ा जाफरी ने सभी 1,526 चयनित हज यात्रियों और उनके परिवारों को एक बार फिर हार्दिक मुबारकबाद देते हुए दुआ की कि अल्लाह तआला सभी की हज यात्रा को आसान बनाए, उनकी इबादत को कबूल फरमाए और उन्हें सकुशल अपने वतन वापस लौटने की तौफीक अता फरमाए।


























