September 5, 2026

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लंढौरा में पुराने ‘अस्पताल कांड’ की फिर खुली फाइल! जुर्माने-माफीनामे के बाद भी जीवन हेल्थ केयर सेंटर पर छापा

City News Network मौहम्मद नाज़िम:::

लंढौरा: स्वास्थ्य विभाग की पूर्व कार्रवाई, जुर्माने और लिखित माफीनामे के बावजूद कथित तौर पर अस्पताल संचालन दोबारा शुरू होने का मामला सामने आने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रुड़की-लक्सर मार्ग पर बस स्टैंड के समीप एक कॉलोनी में संचालित किए जा रहे कथित अस्पताल पर अचानक धावा बोल दिया। टीम के पहुंचते ही मौके पर मरीजों के उपचार से जुड़ी गतिविधियां सामने आईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने परिसर को तत्काल सील कर दिया। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिस संचालक के खिलाफ मंगलवार को कार्रवाई की गई, उसके विरुद्ध करीब डेढ़ वर्ष पहले भी स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर चुका है। जानकारी के मुताबिक उस समय रेलवे रोड स्थित एक भवन में न्यू भारत हेल्थ केयर सेंटर के नाम से अस्पताल संचालित किए जाने की सूचना पर तत्कालीन एसीएमओ अनिल वर्मा के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान विभाग की ओर से करीब 50 हजार रुपये का जुर्माना किए जाने की बात सामने आई थी। इतना ही नहीं, संचालक से लिखित माफीनामा लेकर भविष्य में अस्पताल नहीं चलाने का भरोसा भी लिया गया था। लेकिन कार्रवाई और लिखित आश्वासन के बाद भी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आरोप है कि अस्पताल का पता बदलकर रुड़की-लक्सर मार्ग स्थित एक कॉलोनी की बिल्डिंग में जीवन हेल्थ केयर सेंटर के नाम से मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया। बाद में यहां लगा अस्पताल का बोर्ड भी हटा दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को लगातार अंदर मरीजों का इलाज किए जाने की शिकायतें मिलती रहीं। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी विभागीय टीम कई बार मौके पर कार्रवाई के लिए पहुंची, मगर टीम के पहुंचने से पहले ही कथित तौर पर संचालक को इसकी भनक लग जाती थी। इसके बाद वहां मौजूद मरीजों को हटा दिया जाता था और आसपास के लोगों की ओर से भी यह जताने का प्रयास किया जाता था कि भवन में कोई अस्पताल नहीं चल रहा है। इस दौरान सामान हटाए जाने की बात भी टीम के सामने कही जाती रही। बार-बार सूचना लीक होने की आशंका के बीच स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को इस बार कार्रवाई का तरीका बदल दिया। टीम बिना पूर्व सूचना के अचानक मौके पर पहुंची। जांच के दौरान मरीजों के उपचार से संबंधित गतिविधियां मिलने पर अधिकारियों ने तत्काल परिसर को सील कर दिया। अब इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब संबंधित संचालक के खिलाफ पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी, जुर्माना लगाया गया था और भविष्य में अस्पताल नहीं चलाने का लिखित आश्वासन लिया गया था, तो फिर उसी तरह की गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हो गईं? एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या केवल अस्पताल का स्थान बदल देना उसके संचालन को वैध बना देता है? अगर बिना जरूरी मानकों और अनुमति के यहां मरीजों का इलाज किया जा रहा था और इसी दौरान किसी मरीज की हालत बिगड़ जाती या कोई गंभीर हादसा हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होती? फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की सीलिंग कार्रवाई के बाद मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ होने का इंतजार है।

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