डिज़ाइन से विकास की उड़ान: IIT रुड़की ने उद्योगों को दी नई दिशा
(मौहम्मद नाज़िम ) रुड़की। स्थानीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने और डिज़ाइन आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर ने “एमएसएमई इनोवेटिव (डिज़ाइन) योजना” के तहत इंडस्ट्री–अकादमिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। यह जागरूकता कार्यक्रम 09 फरवरी 2026 को भगवानपुर, जिला हरिद्वार में संपन्न हुआ, जिसमें उद्योग और शिक्षाजगत के बीच समन्वय की मजबूत पहल देखने को मिली। कार्यक्रम अजीत सिंहवी इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसरशिप के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन विभाग, डीएफओ-एमएसएमई हल्द्वानी, सिडकुल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (एसएमएयू) रुड़की चैप्टर और इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन (आईआईए) रुड़की चैप्टर का सहयोग रहा। इस योजना का मूल उद्देश्य देश के विनिर्माण क्षेत्र को डिज़ाइन विशेषज्ञता से जोड़कर उत्पादों में गुणवत्ता, नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है। कार्यक्रम में बताया गया कि अनुभवी डिज़ाइन विशेषज्ञ उद्योगों की वास्तविक समस्याओं का व्यावहारिक और किफायती समाधान उपलब्ध कराते हैं। साथ ही नए उत्पादों के विकास, उत्पादों में मूल्य संवर्धन और सतत सुधार की दिशा में मार्गदर्शन दिया जाता है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. इंदरदीप सिंह, अधिष्ठाता (इन्फ्रास्ट्रक्चर) एवं समन्वयक, डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर, आईआईटी रुड़की द्वारा किया गया। उन्होंने एमएसएमई इकाइयों से आए उद्यमियों को योजना के लाभ, प्रक्रिया और संभावनाओं से अवगत कराया। इस अवसर पर डिज़ाइन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अपूर्ब्बा कुमार शर्मा ने अपने व्याख्यान में कहा कि यदि उद्यम अपनी कार्यप्रणाली में डिज़ाइन सोच को शामिल करें तो वे प्रतिस्पर्धा, लाभप्रदता और स्थिरता—तीनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने उद्योगों को तकनीक और डिज़ाइन के समन्वय से आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में एसएमएयू रुड़की चैप्टर के अध्यक्ष अजय दिगंबर जैन, आईआईए रुड़की चैप्टर के अध्यक्ष प्रवीण गर्ग, एसएमएयू के सचिव अमित गोयल एवं कोषाध्यक्ष आकाश सोनी, आईआईए के सचिव प्रेम सिंह, संयुक्त सचिव दीप मणि मिश्रा, कोषाध्यक्ष सुन्दरम और कार्यालय प्रभारी ज़ुबेर अहमद सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए विशेषज्ञों से संवाद किया और योजना के व्यावहारिक पहलुओं को समझा। कार्यक्रम ने उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग की नई संभावनाओं को मजबूत आधार प्रदान किया।



























