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आईआईटी रुड़की ने दिखाई भविष्य की ऊर्जा की राह, ‘उत्तराखंड हाइड्रोजन वैली’ से बदलेगा प्रदेश का औद्योगिक नक्शा

City News Network (मौहम्मद नाज़िम):::

रुड़की: स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Indian Institute of Technology Roorkee ने “उत्तराखंड इंडस्ट्री-अकादमिक कॉन्क्लेव ऑन हाइड्रोजन 2026” का आयोजन किया। हाइड्रो एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग और पिनाका ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर के नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा “उत्तराखंड हाइड्रोजन वैली” के उस विज़न की रही, जिसे प्रदेश के ऊर्जा और औद्योगिक भविष्य की नई पहचान माना जा रहा है। कॉन्क्लेव में आईआईटी रुड़की ने खुद को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के केंद्रीय ज्ञान एवं नवाचार केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया। प्रस्तावित हाइड्रोजन वैली मॉडल के तहत राज्य के उद्योगों, सरकारी संस्थानों, स्टार्टअप्स और शोध संगठनों को एक मंच पर लाकर ग्रीन हाइड्रोजन की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना रखी गई। इसमें उत्पादन, भंडारण, परिवहन और औद्योगिक उपयोग जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और डीकार्बोनाइजेशन का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। मुख्य अतिथि डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि उत्तराखंड को स्वच्छ ऊर्जा के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने में आईआईटी रुड़की जैसी संस्थाओं की भूमिका बेहद अहम होगी। कॉन्क्लेव में हाइड्रोजन नीति, उद्योग साझेदारी, तकनीकी नवाचार और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने ऋषिकेश स्थित THDC ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का दौरा कर आधुनिक तकनीकों को करीब से समझा। वहीं, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि इस तरह के मंच भारत के लो-कार्बन भविष्य और सतत औद्योगिक विकास को नई गति देने का काम करेंगे।

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