नन्ही सुर-सरिता का बड़ा कमाल: 8 साल की आध्या साहा ने ‘संदेशे आते हैं’ से बांधा समां, सोशल मीडिया पर छाई
(मौहम्मद नाज़िम) कभी-कभी मंच पर ऐसी आवाज गूंजती है जो सीधे दिल तक उतर जाती है। मैनपुरी शहर ने हाल ही में ऐसा ही एक भावुक और गर्व से भर देने वाला क्षण देखा, जब मात्र आठ वर्ष की आध्या साहा ने अपनी देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुति से पूरे सभागार को स्तब्ध कर दिया। सुदिती ग्लोबल एकेडमी की कक्षा तीन की यह नन्ही छात्रा इन दिनों अपने मधुर, संयत और प्रभावशाली गायन को लेकर चर्चा के केंद्र में है। उनकी प्रस्तुति का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है और हर ओर से उन्हें सराहना मिल रही है। कार्यक्रम के दौरान जब आध्या ने चर्चित देशभक्ति गीत संदेशे आते हैं की पहली पंक्ति “संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं” गुनगुनाई, तो वातावरण में एक अलग ही भावनात्मक ऊर्जा फैल गई। उनकी कोमल किंतु आत्मविश्वास से भरी आवाज में भावों की गहराई साफ झलक रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो एक नन्ही बच्ची नहीं, बल्कि देशप्रेम से ओत-प्रोत कोई परिपक्व कलाकार मंच पर अपनी आत्मा उंडेल रहा हो। कुछ ही क्षणों में पूरा सभागार सन्नाटे में डूब गया और गीत समाप्त होते-होते दर्शकों की आंखें नम थीं। तालियों की गूंज ने यह साबित कर दिया कि प्रस्तुति सीधे दिलों को छू गई है। आध्या साहा, मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा की सुपुत्री हैं। उनकी माता कोमल साहा स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रही हैं। अनुशासन, सेवा और संस्कारों से परिपूर्ण इस परिवार में शिक्षा के साथ-साथ कला को भी समान महत्व दिया जाता है। यही पारिवारिक वातावरण आध्या के व्यक्तित्व और प्रतिभा में स्पष्ट दिखाई देता है। परिजनों के अनुसार, आध्या को संगीत से विशेष लगाव है और वह नियमित रूप से रियाज़ करती हैं। विद्यालय के कार्यक्रम हों या अन्य सांस्कृतिक आयोजन, वह पूरे उत्साह और समर्पण के साथ भाग लेती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो क्लिप में उनकी प्रस्तुति को हजारों लोग देख और साझा कर रहे हैं। अनेक उपयोगकर्ताओं ने कमेंट करते हुए लिखा कि इतनी छोटी उम्र में इतना संतुलित सुर, स्पष्ट उच्चारण और भावपूर्ण प्रस्तुति वास्तव में दुर्लभ है। कई लोगों ने इसे “नई पीढ़ी में देशभक्ति की सशक्त झलक” बताया। कुछ संगीत प्रेमियों ने यहां तक कहा कि यदि सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलता रहा, तो आध्या भविष्य में बड़े मंचों पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन से ही यदि बच्चों को कला और संस्कृति से जोड़ा जाए, तो वे न केवल अपनी प्रतिभा को निखारते हैं बल्कि समाज को भी सकारात्मक संदेश देते हैं। आध्या की प्रस्तुति इसी का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, बल्कि समर्पण और अभ्यास ही उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। आज आध्या साहा केवल अपने माता-पिता के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मैनपुरी जनपद के लिए गर्व का कारण बन गई हैं। उनकी आवाज में देशप्रेम की जो सच्ची भावना झलकती है, वह हर श्रोता को भावविभोर कर देती है। नन्हे कदमों से शुरू हुआ यह सुरों का सफर अब दूर तक जाने की ओर अग्रसर है, और मैनपुरी की यह छोटी सी सितारा बच्ची अब देशभर में अपनी चमक बिखेरती नजर आ रही है।

