सफाई कर्मियों के समर्थन में उतरीं कांग्रेस नेत्री पूजा गुप्ता मांगें नहीं मानी गईं तो भूख हड़ताल में भी साथ बैठने का ऐलान
City News Network (मौहम्मद नाज़िम):::
रुड़की: नगर निगम के सफाई कर्मियों की जारी हड़ताल के चलते शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के कई इलाकों में कूड़े के ढेर लगने से हालात बदतर हो गए हैं और दुर्गंध के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच सफाई कर्मियों के समर्थन में कांग्रेस नेत्री, पूर्व मेयर प्रत्याशी तथा कांग्रेस पार्टी के प्रदेश महासचिव सचिन गुप्ता की धर्मपत्नी पूजा गुप्ता धरना स्थल पर पहुंचीं और कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए उनके संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने का भरोसा दिलाया। धरने पर बैठे सफाई कर्मचारियों को संबोधित करते हुए पूजा गुप्ता ने कहा कि शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने में इन कर्मियों की सबसे बड़ी भूमिका होती है। यह वही कर्मचारी हैं जो पर्दे के पीछे रहकर दिन-रात मेहनत करते हुए रुड़की को साफ-सुथरा रखने का काम करते हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज उनकी जायज मांगों की ओर नगर निगम प्रशासन गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याएं पूरी तरह न्यायसंगत हैं और कांग्रेस पार्टी उनके संघर्ष में पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है। पूजा गुप्ता ने भरोसा दिलाया कि वह नगर निगम प्रशासन से बातचीत कर कर्मचारियों की मांगों का समाधान कराने का हरसंभव प्रयास करेंगी। कांग्रेस नेत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कर्मचारियों की मांगों को अनदेखा किया गया और उन्हें अपनी आवाज बुलंद करने के लिए भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा, तो वह सबसे पहले उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठेंगी। पूजा गुप्ता के इस ऐलान के बाद धरना स्थल पर मौजूद सफाई कर्मचारियों में उत्साह देखने को मिला और उन्होंने “पूजा गुप्ता जिंदाबाद” के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। कर्मचारियों ने भी भरोसा जताया कि उनके समर्थन से उनकी आवाज प्रशासन तक मजबूती से पहुंचेगी। धरने पर बैठे सफाई कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उन्हें समान कार्य के बदले समान वेतन नहीं मिलेगा और उनकी अन्य मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
फिलहाल शहर में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है और जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वहीं सफाई कर्मियों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने से यह मुद्दा अब और अधिक गर्माता हुआ नजर आ रहा है।

