नगर निगम रुड़की के टेंडर पर घमासान: क्या बाहरी ठेकेदारों को मिल रहा फायदा?
City News Network (मौहम्मद नाज़िम):::
रुड़की: रुड़की नगर निगम इन दिनों यूनीपोल टेंडर-105 को लेकर घिरता नजर आ रहा है। शहर में इस टेंडर ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां स्थानीय ठेकेदार और विज्ञापन व्यवसाय से जुड़े लोग खुलकर विरोध में उतर आए हैं। मामला अब सिर्फ असंतोष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आधिकारिक शिकायत के जरिए नगर आयुक्त और सहायक नगर आयुक्त के दरवाजे तक पहुंच चुका है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यूनीपोल टेंडर-105 की शर्तें इस तरह से तैयार की गई हैं, जिससे स्थानीय छोटे और मध्यम वर्ग के ठेकेदारों के लिए इसमें भाग लेना लगभग असंभव हो गया है। सबसे ज्यादा विवाद तीन करोड़ रुपये वार्षिक अनुभव की अनिवार्यता को लेकर है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि यह शर्त न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह सीधे तौर पर बाहरी और बड़े ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की रणनीति जैसी प्रतीत होती है।
स्थानीय ठेकेदारों का मानना है कि यह टेंडर “खुली प्रतिस्पर्धा” के बजाय “सीमित खिलाड़ियों का खेल” बनता जा रहा है, जहां छोटे कारोबारी सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं। उनका कहना है कि इस तरह की नीतियां शहर के जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर कर सकती हैं और स्थानीय रोजगार के अवसरों पर भी असर डाल सकती हैं। मामले में एक और गंभीर आरोप यह भी सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी झलक रही है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि नियम और शर्तें इस प्रकार तय की गई हैं, जिनसे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है और पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहर के व्यापारियों और ठेकेदारों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि टेंडर की शर्तों में तत्काल संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि अनुभव की सीमा को घटाकर तीन वर्षों में एक करोड़ रुपये किया जाए, जिससे स्थानीय स्तर के अधिक से अधिक ठेकेदार इस प्रक्रिया में भाग ले सकें और उन्हें भी समान अवसर मिल सके। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, तो यह असंतोष एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। अब सबकी नजरें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाता है—क्या नियमों में बदलाव कर स्थानीय ठेकेदारों को राहत दी जाएगी, या फिर यह टेंडर विवाद यूं ही और गहराता जाएगा। फिलहाल, रुड़की में यूनीपोल टेंडर-105 एक “प्रशासनिक प्रक्रिया” से ज्यादा “स्थानीय बनाम बाहरी” की लड़ाई बन चुका है, जिसका असर आने वाले दिनों में और भी व्यापक रूप में देखने को मिल सकता है।

