आईआईटी रुड़की में एनबीसीएस 2026 की कार्यशाला, सुरक्षित निर्माण पर जोर



City News Network (मौहम्मद नाज़िम):::
रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में राष्ट्रीय भवन निर्माण मानक (एनबीसीएस 2026) को लेकर बीआईएस के सहयोग से महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य भवन निर्माण के नए राष्ट्रीय मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श करना रहा। आईआईटी रुड़की के डब्ल्यूआरडीएम व्याख्यान कक्ष में आयोजित कार्यशाला में संस्थान के निदेशक प्रो. के.के. पंत मुख्य अतिथि रहे, जबकि भारतीय मानक ब्यूरो के उप महानिदेशक (मानकीकरण) संजय पंत ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में बीआईएस, आईआईटी रुड़की और निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। आईआईटी रुड़की के बीआईएस चेयर प्रो. दीपक खरे ने स्वागत संबोधन में राष्ट्रीय मानकों की व्यावहारिक समझ बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने छात्रों को क्विज, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों के माध्यम से मानकीकरण की प्रक्रिया से जोड़ने की संस्थान की पहल की जानकारी दी। तकनीकी सत्र में एनबीसीएस 2026 के प्रमुख प्रावधानों, नए बदलावों, अग्नि एवं जीवन सुरक्षा तथा सुरक्षित निर्माण पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियां दीं। वक्ताओं ने कहा कि मानकों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब इंजीनियर, आर्किटेक्ट, विद्यार्थी और अन्य हितधारक इन्हें समझकर निर्माण कार्यों में प्रभावी ढंग से लागू करें।
बीआईएस के उप महानिदेशक संजय पंत ने कहा कि एनबीसीएस 2026 देश में सुरक्षित, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आईआईटी रुड़की के साथ सहयोग को क्षमता निर्माण और मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अहम बताया। कार्यक्रम में संजय पंत को राष्ट्रीय भवन संहिता के विकास और उन्नयन में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। इसके बाद आयोजित ओपन-हाउस सत्र में छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों ने विशेषज्ञों से संवाद कर एनबीसीएस 2026 के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की।
कार्यशाला के दौरान एनबीसीएस 2026 पर आयोजित क्विज के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रथम स्थान राहुल भसीन, द्वितीय सागर जायसवाल और तृतीय स्थान अक्षत गुप्ता ने हासिल किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, शोधकर्ता, छात्र और निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।


























